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फर्जी डिग्री से इंजीनियर बना,लाखों वेतन हड़पे—खगड़िया नगर परिषद के बर्खास्त अफसर पर सनसनीखेज खुलासा…

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फर्जी डिग्री से इंजीनियर बना,लाखों वेतन हड़पे—खगड़िया नगर परिषद के बर्खास्त अफसर पर सनसनीखेज खुलासा…

प्रवीण कुमार प्रियांशु। खगड़िया

खगड़िया नगर परिषद में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका ताजा उदाहरण तब सामने आया जब एक कनिष्ठ अभियंता (जूनियर इंजीनियर) रोशन कुमार पर फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी हथियाने और लाखों रुपये वेतन उठाने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ। यह आरोप किसी और ने नहीं, बल्कि नगर परिषद की सभापति अर्चना कुमारी ने स्वयं लगाए हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की गंभीर जांच और शीघ्र कार्रवाई के निर्देश देते हुए कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र सौंपा है।

बिना वैध नियुक्ति,योजनाओं में भी निभाई अहम भूमिका…

सभापति के अनुसार, रोशन कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह संदिग्ध है। फर्जी तरीके से सरकारी पद हथियाने के बाद उन्होंने न केवल वेतन की अवैध निकासी की, बल्कि नगर परिषद की विभिन्न योजनाओं में भी प्रभावी भूमिका निभाई, जो कि नियम विरुद्ध है।

राज्य तकनीकी शिक्षा परिषद का नाम कर किया छल…

रोशन कुमार द्वारा प्रस्तुत डिग्री और तकनीकी प्रमाणपत्र राज्य तकनीकी शिक्षा परिषद, बिहार के नाम से जारी किए गए हैं, लेकिन प्रारंभिक जांच में वे प्रमाणपत्र जाली और नकली पाए गए हैं। सभापति ने संबंधित प्रमाणपत्रों की सत्यता की जांच तथा उनके माध्यम से अर्जित की गई संपत्ति की जांच की भी मांग की है।

तीन दिन में मांगी गई रिपोर्ट, कार्रवाई न होने पर बड़ा कदम संभव…

सभापति अर्चना कुमारी ने स्पष्ट किया है कि यह मामला महज एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि नगर परिषद की साख से जुड़ा है। उन्होंने इस प्रकरण में तीन दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की है और चेतावनी दी है कि यदि इस पर त्वरित कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे की संवैधानिक कार्यवाही को बाध्य होंगी।

प्रमाण पत्र की प्रतियां जांच के लिए भेजी जाएंगी…

मामले से जुड़े दस्तावेज और प्रमाणपत्र की प्रतियां संलग्न कर दी गई हैं, जिन्हें आगामी जांच एजेंसियों को सौंपा जाएगा। अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला बिहार के तकनीकी संस्थानों और सरकारी नियुक्ति प्रणाली पर भी गहरा प्रश्नचिन्ह खड़ा करेगा।

शहर में हड़कंप,कार्रवाई की मांग तेज…

इस खुलासे के बाद नगर परिषद और पूरे शहर में भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्सा और नाराजगी का माहौल है। स्थानीय नागरिक और जनप्रतिनिधि तत्काल सस्पेंशन और एफआईआर की मांग कर रहे हैं।

“यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और गंभीर मामला है कि नगर परिषद खगड़िया में एक व्यक्ति ने फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर न सिर्फ सरकारी पद हासिल किया, बल्कि योजनाओं में भी अवैध रूप से भागीदारी की और लाखों की अवैध निकासी की। यह जनता के विश्वास के साथ छल है और प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

इस पुरे मामले में खगड़िया नगर सभापति अर्चना कुमारी ने बताई-

मैंने खुद इस मामले की पूरी जानकारी लेकर संबंधित अधिकारी को पत्र लिखकर तीन दिन के भीतर जांच और कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया है। यदि नियमानुसार कार्रवाई नहीं होती है तो मैं आगे उच्चस्तरीय जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए बाध्य होऊंगी। इस तरह की लापरवाही और भ्रष्टाचार को नगर परिषद में किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

फर्जी नियुक्ति का खुला खेल खगड़िया में, नगर परिषद के आदेश को ठेंगा दिखा कर अब भी कुर्सी पर जमे ‘फर्जी बहाल’जांच समिति, राज्य शिक्षा परिषद, विभागीय आदेश — सबने कहा ‘नियुक्ति अवैध’, फिर भी कार्रवाई नहीं: क्या पूरा सिस्टम शामिल है इस साजिश में?

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फर्जी नियुक्ति का खुला खेल खगड़िया में, नगर परिषद के आदेश को ठेंगा दिखा कर अब भी कुर्सी पर जमे ‘फर्जी बहाल’…

जांच समिति, राज्य शिक्षा परिषद, विभागीय आदेश — सबने कहा ‘नियुक्ति अवैध’, फिर भी कार्रवाई नहीं: क्या पूरा सिस्टम शामिल है इस साजिश में?

प्रवीण कुमार प्रियांशु। खगड़िया

खगड़िया नगर परिषद में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे सरकारी तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला है नगर परिषद के अंतर्गत एक कर्मी की फर्जी नियुक्ति का,जिसे नगर परिषद की जांच, राज्य शिक्षा विभाग की पुष्टि,और विधिवत आदेश के बाद भी अब तक नियोजन रद्द नहीं किया गया है।और ना ही नगर कोष में अब तक की प्राप्त राशि जमा की गई है जबकि दो दिनों के अंदर राशि जमा करने का आदेश दिया गया था।यह मामला केवल एक व्यक्ति की फर्जी नियुक्ति का नहीं है — यह दर्शाता है कि कैसे “सिस्टम के भीतर ही सिस्टम को अपाहिज किया जा सकता है”।

📌 मामले की तह में क्या है?

नगर परिषद खगड़िया के अंतर्गत कार्यरत कर्मी (रोशन कुमार) की नियुक्ति को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
नगर परिषद की स्थायी समिति की बैठक दिनांक 22.10.2024 को एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें नियुक्ति प्रक्रिया की जांच का निर्णय लिया गया।

जांच में पाया गया कि —
नियुक्ति पत्र में उल्लिखित राज्य स्तरीय आदेश या तकनीकी शिक्षा परिषद की कोई वैध अनुशंसा मौजूद नहीं थी।
राज्य शिक्षा विभाग, बिहार द्वारा जारी पत्रांक संख्या 4213 (दिनांक 14.07.2025) के अनुसार स्पष्ट कर दिया गया कि इस नियुक्ति की कोई वैधानिक स्वीकृति नहीं है।इसके बाद नगर परिषद ने दिनांक 25.07.2025 को पत्रांक 1522 के माध्यम से संबंधित कर्मी को सेवा से मुक्त करने और अब तक प्राप्त मानदेय की वसूली के आदेश जारी किए।लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात ये है —इतने स्पष्ट, दस्तावेज-आधारित और विधिवत आदेश के बावजूद संबंधित कर्मी आज भी पद पर बना हुआ है।


👉 आदेश को निष्प्रभावी बनाकर छोड़ देना,
👉 नगर कोष में अब तक की प्राप्त राशि की वसूली नहीं करना,
👉 और बिना वैधानिक नियुक्ति के कार्यरत कर्मी को जारी रखना —
इन सब बातों ने इस पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

क्या प्रशासन की चुप्पी इत्तेफाक है, या मिलीभगत?

यह प्रश्न अब आम जनता से लेकर प्रशासनिक हलकों में भी उठ रहा है कि — क्या एक अकेला व्यक्ति इतने बड़े घोटाले को अंजाम दे सकता है? या फिर पूरा सिस्टम ही मौन समर्थन में है?

नगर परिषद स्वयं अपने ही आदेश को लागू नहीं कर पा रही — ये एक असहाय संस्थान की नहीं, बल्कि संलिप्त संस्थान की तस्वीर पेश करता है।

🔍 जनता में आक्रोश, उठी उच्च स्तरीय जांच की मांग

स्थानीय जनप्रतिनिधि, पारदर्शिता समर्थक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने अब CBI जांच, या राज्य निगरानी इकाई (SVU) से मामले की विस्तृत जांच की मांग की है।

वेतन की वसूली,विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही और नगर परिषद की निष्क्रियता — तीनों स्तरों पर एक साथ जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।

📣 विशेष संवाद: “ये सिर्फ एक नियुक्ति नहीं, ये विश्वासघात है जनता के साथ”

एक स्थानीय RTI कार्यकर्ता ने कहा:
“जब खुद नगर परिषद द्वारा नियुक्त समिति कहे कि नियुक्ति फर्जी है, और फिर भी कोई कार्रवाई न हो — तो ये समझना मुश्किल नहीं कि भ्रष्टाचार सिर्फ गलती नहीं, अब नीतिगत हिस्सा बन चुका है।”

📍 अब सवाल यह है…
अगर यह व्यक्ति सेवा में अवैध रूप से बना हुआ है, तो किसके संरक्षण में?

अब तक वसूली क्यों नहीं हुई?
नगर परिषद अपने ही आदेशों को लागू क्यों नहीं कर रही?
क्या यह मामला अकेले रोशन कुमार तक सीमित है या इस तरह के और नियुक्ति घोटाले दबाए जा रहे हैं?
“जब फर्जीवाड़ा खुले आम हो और आदेश सिर्फ फाइलों में दम तोड़े — तब जान लीजिए,भ्रष्टाचार अब नियम बन चुका है।”

इस पुरे मामले में पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सह रेटेनर नगर परिषद खगड़िया श्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा-


“यह एक अत्यंत गंभीर मामला है। जब किसी नियुक्ति को नगर परिषद की जांच समिति, राज्य शिक्षा विभाग और विभागीय आदेश द्वारा ‘अवैध’ घोषित किया जा चुका है, फिर भी यदि वह व्यक्ति अब तक सेवा में बना हुआ है, तो यह सीधा-सीधा कानून के शासन का उल्लंघन है।
नगर परिषद द्वारा जारी सेवा समाप्ति आदेश को निष्क्रिय छोड़ देना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 311 (सरकारी सेवक की सेवा समाप्ति की प्रक्रिया) का भी खुला उल्लंघन हो सकता है।
अगर किसी व्यक्ति ने फर्जी तरीके से नियुक्ति प्राप्त की है और फिर भी उसे हटाया नहीं जा रहा, तो इसमें स्पष्ट रूप से ‘प्रशासनिक मिलीभगत’ या ‘निष्क्रिय सहमति’ की बू आती है।इस तरह के मामलों में स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य निगरानी विभाग, लोकायुक्त या उच्च न्यायालय द्वारा PIL (जनहित याचिका) के माध्यम से हस्तक्षेप किया जाना चाहिए।इसके अलावा, यदि वसूली का आदेश दो दिनों में राशि जमा करने को कहता है, और महीनों बीतने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती, तो यह लोक धन की बर्बादी और आपराधिक लापरवाही का विषय बनता है।अंततः, यह सिर्फ एक नियुक्ति घोटाले का मामला नहीं है — यह उस पूरे तंत्र की पोल खोलता है जो भ्रष्टाचार को संरक्षण देता है। इस पर उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच अनिवार्य है।”

खगड़िया नगर परिषद में 10 वर्षों तक फर्जी डिग्री पर जेईई की नौकरी! बर्खास्त रोशन कुमार की पोल खुली,नगर परिषद बना था भ्रष्टाचार का अड्डा…

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खगड़िया नगर परिषद में 10 वर्षों तक फर्जी डिग्री पर जेईई की नौकरी! बर्खास्त रोशन कुमार की पोल खुली,नगर परिषद बना था भ्रष्टाचार का अड्डा…

प्रवीण कुमार प्रियांशु।खगड़िया

खगड़िया नगर परिषद में अब तक की सबसे बड़ी नियुक्ति घोटाले का खुलासा हुआ है। फर्जी डिप्लोमा डिग्री के सहारे पिछले 10 वर्षों से कनीय अभियंता (जेईई) के पद पर कार्यरत रोशन कुमार की डिग्री बिहार राज्य तकनीकी शिक्षा बोर्ड ने पूरी तरह फर्जी और जाली घोषित कर दी है। इस खुलासे के बाद से नगर परिषद कार्यालय से लेकर जिला प्रशासन तक में हड़कंप मच गया है।

जिन शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों के आधार पर रोशन कुमार वर्ष 2014 से 2025 तक नगर परिषद में जेईई के पद पर कार्यरत रहे, वे प्रमाण-पत्र पूरी तरह नकली पाए गए हैं। यह जानकारी नगर सभापति अर्चना कुमारी द्वारा डिग्री सत्यापन के लिए भेजे गए आवेदन पर तकनीकी शिक्षा बोर्ड से प्राप्त हुई। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने वर्षों तक एक फर्जी अभियंता कैसे बिना किसी रोक-टोक के नगर परिषद में सेवा करता रहा?

विज्ञापन रद्द, फिर भी मिली नौकरी — नियमों को रौंदकर हुई बहाली…

रोशन कुमार की नियुक्ति की कहानी भी किसी सस्पेंस फिल्म से कम नहीं है। वर्ष 2013 में नगर परिषद खगड़िया ने कनीय अभियंता की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला था, जिसमें रोशन ने आवेदन दिया था। लेकिन बाद में बोर्ड की बैठक में नियुक्ति प्रक्रिया रद्द कर दी गई थी।इसके बावजूद, तत्कालीन नगर परिषद अध्यक्ष और कुछ अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर वर्ष 2014 में सशक्त स्थायी समिति के अनुमोदन से रोशन कुमार को मात्र ₹1100 प्रतिदिन के मानदेय पर नियुक्त कर लिया। समय के साथ उनका मानदेय ₹22,000 मासिक तक पहुंच गया और वह लगातार एक दशक तक कार्यरत रहे।

बर्खास्तगी के बाद कोर्ट गए, वहीं हुआ भंडाफोड़…

जब वर्तमान सभापति अर्चना कुमारी और नगर परिषद की सशक्त स्थायी समिति ने रोशन कुमार को बर्खास्त करने की अनुशंसा की तो उन्होंने अपने बचाव में न्यायालय की शरण ली। यहीं से पूरे मामले ने नया मोड़ लिया। डिग्री की वैधता पर उठते सवालों के बीच सभापति द्वारा तकनीकी शिक्षा बोर्ड से कराई गई जांच में सामने आया कि उनके सभी प्रमाण-पत्र फर्जी हैं।

“लूट का अड्डा बना दिया था नगर परिषद” – अर्चना कुमारी…

सभापति अर्चना कुमारी ने स्पष्ट आरोप लगाते हुए कहा कि “पूर्व अध्यक्ष और कुछ अधिकारियों ने मिलीभगत कर रोशन कुमार की नियुक्ति मनमाने तरीके से की थी। एक फर्जी अभियंता ने नगर परिषद को अपनी लूट का अड्डा बना दिया था। हमने उनकी बर्खास्तगी की और सत्यापन में उनकी डिग्री भी फर्जी साबित हो गई।”

एफआईआर की मांग तेज, उपसभापति ने की सख्त कार्रवाई की वकालत…

नगर परिषद की उपसभापति शबनम जबीन ने कहा, “यह केवल एक फर्जी नियुक्ति नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था और जनधन की खुली लूट है। रोशन कुमार पर आपराधिक मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। इसके अलावा जिन अधिकारियों ने बहाली में सहयोग किया, उन्हें भी जांच के घेरे में लाया जाए।”

प्रशासन के लिए चुनौती: सिर्फ रोशन नहीं, और भी फर्जी नियुक्तियां?

इस मामले ने नगर परिषद की पूरी बहाली प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह आशंका गहराती जा रही है कि क्या रोशन कुमार अकेले थे या ऐसे और भी फर्जी डिग्रीधारी नगर परिषद में वर्षों से सेवा कर रहे हैं?अब यह खगड़िया जिला प्रशासन और नगर विकास विभाग के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गई है।

मुख्य बिंदु एक नजर में:

 10 वर्षों तक फर्जी डिग्री पर नगर परिषद में जेईई की नौकरी…

डिप्लोमा प्रमाण-पत्र जाली, तकनीकी शिक्षा बोर्ड ने किया खुलासा…

नियमों को ताक पर रखकर मनमानी बहाली, पदाधिकारी जांच के घेरे में…

न्यायालय में मामला जाते ही डिग्री जांच कराई गई, खुल गई पोल…

सभापति और उपसभापति ने की कड़ी कार्रवाई की सिफारिश…

 एफआईआर और विभागीय जांच की मांग जोरों पर…

क्या रोशन कुमार की बर्खास्तगी भर से खत्म हो जाएगा यह फर्जीवाड़ा?

या फिर होगी एक व्यापक जांच जिससे अन्य दोषी भी होंगे बेनकाब?

अब खगड़िया की जनता चाहती है न्याय और पारदर्शिता।

फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र के सहारे BPSC की प्रधानाध्यापक परीक्षा पास,खगड़िया में नौकरी! शिक्षा विभाग को गुमराह कर जालसाजी का आरोप…

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फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र के सहारे BPSC की प्रधानाध्यापक परीक्षा पास,खगड़िया में नौकरी! शिक्षा विभाग को गुमराह कर जालसाजी का आरोप…

 

प्रवीण कुमार प्रियांशु। खगड़िया 

खगड़िया शिक्षा व्यवस्था को कलंकित करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित प्रधानाध्यापक परीक्षा में फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र के सहारे अभ्यर्थी ने न सिर्फ परीक्षा पास की बल्कि खगड़िया में प्रधानाध्यापक शिक्षक पदस्थापना भी प्राप्त कर ली।

प्राप्त आवेदन के अनुसार, विजय कुमार सिंह, जो वर्तमान में उत्क्रमित उच्च विद्यालय सन्हौली में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं, ने BPSC रोल नंबर 311588 के साथ परीक्षा में भाग लिया। आवेदनकर्ता प्रवीण कुमार प्रियांशु ने आरोप लगाया है कि विजय कुमार सिंह ने गलत अनुभव प्रमाणपत्र लगाकर विभाग व आयोग को गुमराह किया और धोखाधड़ी के बल पर पद हासिल किया।

शिकायत में यह भी उल्लेख है कि बीपीएससी की प्रधानाध्यापक परीक्षा के लिए न्यूनतम 10 वर्षों का अनुभव आवश्यक था, लेकिन उक्त शिक्षक ने फर्जी माध्यमिक विद्यालय का अनुभव दर्शाकर नियमों की अनदेखी की। विभाग को प्रस्तुत अनुभव प्रमाण पत्र की सत्यता पर संदेह जताया गया है,जिसे जालसाजी कर तैयार किया गया बताया जा रहा है।

इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आवेदनकर्ता ने अध्यक्ष लोक सेवा आयोग पटना, क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक मुंगेर,जिला शिक्षा पदाधिकारी खगड़िया,जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा), खगड़िया , जिलाधिकारी महोदय, खगड़िया को आवेदन सौंपते हुए मांग की है कि इस फर्जीवाड़े की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषी व्यक्ति पर शीघ्र कठोर कार्रवाई की जाए।

परीक्षा संचालन में नियमों की अनदेखी!प्रधानाध्यापक रहते सहायक शिक्षक बने केन्द्राधीक्षक, शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल…

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परीक्षा संचालन में नियमों की अनदेखी!प्रधानाध्यापक रहते सहायक शिक्षक बने केन्द्राधीक्षक, शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल…

प्रवीण कुमार प्रियांशु। खगड़िया 

खगड़िया में बिहार केन्द्रीय चयन पार्षद द्वारा आयोजित सिपाही भर्ती परीक्षा-2025 को लेकर जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग ने केंद्राधीक्षकों की जो सूची जारी की है, वह अब विवादों के घेरे में आ गई है। शिक्षा विभाग की ओर से जारी इस सूची में कई ऐसे नाम शामिल हैं, जिन्होंने विभागीय नियमों और परंपराओं को ठेंगा दिखाते हुए अनियमित तरीके से परीक्षा केंद्र की जिम्मेदारी हासिल कर ली है।

सबसे बड़ा उदाहरण उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सन्हौली (खगड़िया) का है। यहां की प्रधानाध्यापक नीलीमा कुमारी को परीक्षा केंद्र का केन्द्राधीक्षक बनाया गया है, जो कि विभागीय दृष्टिकोण से सर्वथा उपयुक्त है। लेकिन इसी विद्यालय के सहायक शिक्षक विजय कुमार सिंह को भी एक अन्य परीक्षा केंद्र – मध्य विद्यालय, हाजीपुर उत्तर – का केन्द्राधीक्षक बना दिया गया है, जो नियमों और प्रशासनिक मानकों के विपरीत प्रतीत होता है।

विभागीय परिपाटी के विरुद्ध फैसला?

परीक्षा संचालन के लिए सामान्यतः वरिष्ठ शिक्षक या प्रधानाध्यापक को ही केन्द्राधीक्षक की जिम्मेदारी दी जाती है, ताकि वे समुचित अनुभव और प्रशासनिक योग्यता के आधार पर परीक्षा को शांतिपूर्ण व कदाचारमुक्त तरीके से संचालित कर सकें। वहीं सहायक शिक्षक को केन्द्राधीक्षक के सहयोग में कार्य करने हेतु प्रतिनियुक्त किया जाता है। लेकिन इस मामले में न केवल सहायक शिक्षक को केंद्राधीक्षक बना दिया गया है, बल्कि उनके विद्यालय में पहले से कार्यरत प्रधानाध्यापक की मौजूदगी को भी दरकिनार कर दिया गया है।

प्रभारी प्रधानाध्यापक की भी अनदेखी!

वर्तमान समय में जिले के कई विद्यालयों में प्रभारी प्रधानाध्यापक कार्यरत हैं, जो वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर परीक्षा केंद्र की जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं। ऐसे में उनकी उपेक्षा कर एक सहायक शिक्षक को केन्द्राधीक्षक बनाना विभागीय नीति पर सवाल खड़ा करता है।

क्या है विभाग की मंशा?

शिक्षा विभाग की इस नियुक्ति प्रक्रिया पर शिक्षकों एवं बुद्धिजीवियों में रोष है। उनका मानना है कि परीक्षा जैसे गंभीर व गोपनीय कार्य में इस तरह की मनमानी न केवल परीक्षा की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि इससे विभागीय आचार-संहिता की भी अवहेलना होती है। कुछ शिक्षक संगठनों ने यह भी आशंका जताई है कि ऐसे निर्णयों में व्यक्तिगत प्रभाव या सिफारिश की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।

पारदर्शिता की मांग

इस पूरे प्रकरण को लेकर कई शिक्षक संगठनों ने जिला प्रशासन एवं बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से जवाबदेही की मांग की है। साथ ही मांग की है कि केन्द्राधीक्षकों की पुनः समीक्षा कर नियमसंगत रूप से अनुभवशील प्रधानाध्यापकों को ही यह जिम्मेदारी सौंपी जाए।

फर्जी बहाली का भंडाफोड़ करने वाले पूर्व पुलिस अवर निरीक्षक की गुहार—न्याय नहीं मिला तो पीएम की सभा में करूंगा आत्मदाह…

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फर्जी बहाली का भंडाफोड़ करने वाले पूर्व पुलिस अवर निरीक्षक की गुहार—न्याय नहीं मिला तो पीएम की सभा में करूंगा आत्मदाह…

प्रवीण कुमार प्रियांशु। खगड़िया

फर्जी बहाली और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना एक पूर्व पुलिस अवर निरीक्षक को भारी पड़ गया। खगड़िया जिले के मानसी थाना में पदस्थापित रहे पूर्व पुलिस अवर निरीक्षक अमलेन्दु कुमार सिंह ने प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर गंभीर आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि उन्हें शीघ्र न्याय नहीं मिला, तो वे प्रधानमंत्री की आगामी बिहार दौरे के दौरान आम सभा में आत्मदाह कर लेंगे।

हाजीपुर, वैशाली निवासी अमलेन्दु कुमार सिंह ने पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, राज्यपाल सहित देश-प्रदेश के कई शीर्ष अधिकारियों को संबोधित कर न्याय की गुहार लगाई है। अपने तीन पृष्ठों के आवेदन में उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे उन्होंने खगड़िया जिले में रहते हुए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक द्वारा की गई कथित फर्जी बहालियों और भ्रष्टाचार का खुलासा किया, जिसके बाद उन्हें षड्यंत्रपूर्वक झूठे मामलों में फंसाया गया।पूर्व पुलिस अवर निरीक्षक का आरोप है कि उन्हें पहले मनगढ़ंत धाराओं में फंसाकर गिरफ्तार किया गया, फिर जेल भेज दिया गया और बाद में सेवा से निलंबित कर दिया गया। इतना ही नहीं, उन्हें मिलने वाला जीवन यापन भत्ता तक रोक दिया गया, जिससे उनका और उनके परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो गया है।

अदालत और मुख्यालय के आदेश का नहीं हो रहा पालन…

अमलेन्दु सिंह ने यह भी बताया कि पटना उच्च न्यायालय तथा बिहार पुलिस मुख्यालय द्वारा उनके पक्ष में आदेश पारित किए गए, जिनमें जीवन यापन भत्ता भुगतान और सेवा से निलंबन समाप्त करने की बात कही गई। बावजूद इसके स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी आदेशों का अनुपालन नहीं कर रहे हैं।उन्होंने दावा किया कि रोहतास स्थानांतरण के बाद उन्हें जानबूझकर आर्थिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उनके अनुसार, पिछले कई महीनों से उन्हें कोई वेतन नहीं दिया गया, जिससे उनके परिवार की स्थिति दयनीय हो चुकी है।

सीबीआई या सीबीसी स्तर की जांच की मांग…

अमलेन्दु सिंह ने स्पष्ट तौर पर मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच CBI या CBC जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों के खिलाफ उन्होंने भ्रष्टाचार उजागर किया, वे अब भी सक्रिय हैं और उन पर प्रभाव डाल रहे हैं।

20 जुलाई तक का दिया अल्टीमेटम…

अपने पत्र में उन्होंने अंतिम चेतावनी देते हुए लिखा है कि यदि 20 जुलाई 2025 तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे मजबूर होकर प्रधानमंत्री की आमसभा में आत्मदाह जैसा कदम उठाएंगे। उन्होंने इसे अपने आत्मसम्मान, न्याय और लोकतंत्र की रक्षा की अंतिम कोशिश बताया।

मानवाधिकार हनन का गंभीर आरोप…

पत्र में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूरे मामले में पुलिस विभाग द्वारा उनके साथ किया गया व्यवहार मानवाधिकार का खुला उल्लंघन है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।

भूमि विवाद को लेकर मारपीट व जान से मारने की धमकी, पीड़ित ने थाने में लगाई सुरक्षा की गुहार…

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भूमि विवाद को लेकर मारपीट व जान से मारने की धमकी, पीड़ित ने थाने में लगाई सुरक्षा की गुहार…

कोशी24न्यूज। खगड़िया 

खगड़िया जिले के ओलापुर गंगौर थाना क्षेत्र निवासी दशरथ प्रसाद दास ने भूमि विवाद को लेकर मारपीट और जान से मारने की धमकी की शिकायत स्थानीय थाना प्रभारी से की है। पीड़ित का आरोप है कि उसकी जमीन पर बलपूर्वक कब्जा करने की नीयत से कुछ लोगों द्वारा 24 जून 2025 को मारपीट की गई और धमकी दी गई।

दशरथ प्रसाद दास ने बताया कि खाता संख्या 348, 345, खेसरा संख्या 418, 419, 416, 417 की जमीन पर बवली देवी पति-स्व० रामसागर पोद्दार, अनिता देवी,संजू एवं कृष्णा पोद्दार सहित अन्य लोग जबरन कब्जा कर रहे हैं। इस दौरान मोबाइल छीनने और अपशब्द कहने जैसी घटनाएं भी हुईं। पहले भी 10 मई 2025 को इस संदर्भ में थाने को आवेदन दिया गया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
पीड़ित ने थाने से अपने परिवार की सुरक्षा और उक्त जमीन को कब्जा मुक्त कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने बताया कि बवली देवी का समुचित परिवार पिटाई किया है और आगे भी पीटवाना चाहता है।
पीड़ित ने थाने में लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है और प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है।

खगड़िया जिला का 44 वां स्थापना दिवस पर क्या खोया क्या पाया, विषयक समीक्षात्मक परिचर्चा का किया गया आयोजन…

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खगड़िया जिला का 44 वां स्थापना दिवस पर क्या खोया क्या पाया, विषयक समीक्षात्मक परिचर्चा का किया गया आयोजन…

खगड़िया का सर्वांगीण विकास कर ही जिला शिक्षित विकसित एवं समृद्ध होगा – किरण देव यादव

प्रवीण कुमार प्रियांशु। खगड़िया

खगड़िया: देश बचाओ अभियान के बैनर तले खगड़िया जिला का 44 वां स्थापना दिवस के अवसर पर क्या खाया क्या पाया, विषयक समीक्षात्मक परिचर्चा का आयोजन किया गया। तथा जिला कैसे बेहतर शिक्षित विकसित समृद्ध जिला बने, इस पर सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने बेबाक तरीके से अपनी विचार रखें। परिचर्चा की अध्यक्षता अभियान के संस्थापक अध्यक्ष किरण देव यादव ने किया। श्री यादव ने कहा कि शिक्षा, रोजगार, जिला का सर्वांगीण विकास सहित जिले में मक्का दूध केला मछली आधारित फैक्ट्री का निर्माण करने, हवाई अड्डा का निर्माण करने, एम्स हॉस्पिटल का निर्माण करने, फरकिया के क्षेत्र में डिग्री कॉलेज की स्थापना करने, सहित भ्रष्टाचार पर रोक लगाकर ही खगड़िया जिला बेहतर समृद्ध शिक्षित विकसित होगा। वहीं किसान मजदूर छात्र नौजवान महिलाओं को अधिकार देकर तथा श्रम कानून को धरातल पर लागू कर, किसानों को सस्ते दर पर खाद बीज पानी एवं लागत पूंजी के फसल का दाम दुगुनी करने, सभी प्रकार का ऋण माफ करने, छात्रों को उच्चतम शिक्षा व्यावसायिक और रोजगारोन्मुखी शिक्षा देने की जरूरत है। अपराध पर नियंत्रण कर तथा जमीनी विवाद समाप्त कर खगड़िया उन्नत एवं खुशहाल होगा। कोर्ट थाना में कैसे का भोज हा काम करने की जरूरत है, लंबे अरसे से विचाराधीन कैदी को रिहा करने की आवश्यकता है। सरकार की सभी योजनाओं को धरातल पर लागू कर सच्चे अर्थों में खगड़िया का सर्वांगीण विकास संभव हो पाएगा। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अधिकार देकर वेतन पेंशन भत्ता वृद्धि कर सम्मान सुरक्षा देने तथा सामाजिक सुरक्षा के तहत वृद्धा विधवा विकलांग पेंशन 6000 रुपए मासिक करने से खगड़िया जिला एवं जनता का सर्वांगीण विकास हो पाएगा। अलौली से कुशेश्वरस्थान तक ट्रेन चालू करने की मांग किया तथा विरासत धरोहर 52 कोठारी 53 द्वार, कसरैया धार, अलौली गढ़, सन्हौली दुर्गा, स्थान, कात्यायनी मंदिर, अघौरी स्थान का पर्यटन का दर्जा देकर विकसित करने से खगड़िया जिला का सामाजिक आर्थिक राजनीतिक भौगोलिक सांस्कृतिक आध्यात्मिक विकास होगा।श्री यादव ने कहा कि उक्त सवालों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं को सतत् संघर्ष करने की जरूरत है। सभी सरकारी योजनाओं को धरातल पर लागू करने की जरूरत है।परिचर्चा कार्यक्रम में अभियान के सचिव धर्मेंद्र कुमार , प्रवक्ता गुड्डू ठाकुर , संयोजक मधुबाला, संयुक्त सचिव कालेश्वर ठाकुर, महासचिव उमेश ठाकुर, प्रज्ञा कुमारी, आदि ने भाग लिया तथा महत्वपूर्ण सुझाव देकर जिला को समृद्ध करने में संघर्ष तेज करने का अपील किया। गायिका चंपा राय ने सुंदर छै अपन जिला खगड़िया, गाकर खगड़िया जिला का आन बान शान को बढ़ाने का कार्य की ।

खगड़िया का 44वां स्थापना दिवस पर उत्सवी रंग में डूबा रहा लक्ष्मी देवी उच्च माध्यमिक विद्यालय,शुम्भा; विभिन्न कार्यक्रम आयोजित…

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खगड़िया का 44वां स्थापना दिवस पर उत्सवी रंग में डूबा रहा लक्ष्मी देवी उच्च माध्यमिक विद्यालय,शुम्भा; विभिन्न कार्यक्रम आयोजित…

प्रवीण कुमार प्रियांशु। खगड़िया 

खगड़िया जिला की 44वां स्थापना दिवस पर लक्ष्मी देवी उच्च माध्यमिक विद्यालय,शुम्भा में शनिवार को विद्यालय स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।जिसमें विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।इस अवसर पर साईकिल रैली,गीत-संगीत साथ ही रंगोली निर्माण सहित विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया।

सुबह में प्रभात फेरी निकाली गई।जिसमें विद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने भाग लिया।स्कूली बच्चों द्वारा निकाली गई प्रभातफेरी शुम्भा चौक होते हुए विभिन्न टोला-मुहल्ला से भ्रमण करते हुए विद्यालय परिसर में आकर समाप्त हुआ।इस दौरान स्कूली बच्चों ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, शराबबंदी, जल जीवन हरियाली, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सुधार, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आदि विषयों से संबंधित संदेश और स्लोगन लिखकर अपने हाथों में लिए हुए थे।मौके पर प्रधानाध्यापक अभिषेक आनंद,वरीय शिक्षिका सविता कुमारी,अमित कुमार,विशाल कुमार,सुरज कुमार, भुपेंद्र कुमार, सुभद्रा कुमारी,सुषमा कुमारी,ज्योति कुमारी,किशोर कुमार ,सिकन्दर महाराज,कृष्णा कुमार सहित सभी शिक्षक व शिक्षिका उपस्थित थे।

बहादुरपुर थाना परिसर में कई मामलों में जब्त देशी व विदेशी शराब का हुआ विनष्टीकरण…

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बहादुरपुर थाना परिसर में कई मामलों में जब्त देशी व विदेशी शराब का हुआ विनष्टीकरण…

प्रवीण कुमार प्रियांशु। खगड़िया 

खगड़िया जिले के अलौली प्रखंड अंतर्गत बहादुरपुर थाना परिसर में सोमवार को विभिन्न कांडों में जब्त विदेशी और देशी शराब का विनष्टीकरण किया गया।जिला से पहुंचे मद्य निषेध थाना के पदाधिकारी,बहादुरपुर थानाध्यक्ष राजीव कुमार,अलौली अंचलाधिकारी हिमांशु कुमार की उपस्थिति में थाना परिसर में ही जेसीबी से गड्ढा खोद कर विभिन्न मामलों में जब्त शराब को विनिष्ट किया गया।इस सबंध में थानाध्यक्ष राजीव कुमार ने बताया कि पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर बहादुरपुर थाना के कई कांडों में जब्त किए गये 85 लीटर देशी एवं 744 लीटर विदेशी शराब का विनष्टीकरण किया गया।उन्होंने बताया कि 744 लीटर विदेशी शराब एवं 85 लीटर देशी महुआ शराब का विनिष्टीकरण किया गया।मौके पर अलौली अंचलाधिकारी हिमांशु कुमार, थानाध्यक्ष राजीव कुमार,मद्य निषेध थाना के पदाधिकारी सहित बहादुरपुर थाना के अन्य पुलिस पदाधिकारी तथा चौकीदार उपस्थित थे…।।

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