खगड़िया में फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र से बना प्रधानाध्यापक, शिक्षा विभाग की मिलीभगत से गहराया भरोसे का संकट,दो भाइयों पर गंभीर आरोप,जांच की मांग तेज…

प्रवीण कुमार प्रियांशु | खगड़िया

खगड़िया जिले की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले के अलौली प्रखंड अंतर्गत माध्यमिक विद्यालयों में पदस्थापन को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है,जिसमें फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र के सहारे शिक्षक विजय कुमार सिंह व उनके भाई नवल कुमार सिंह द्वारा प्रधानाध्यापक पद हासिल करने का आरोप लगाया गया है। इस पूरे प्रकरण ने न सिर्फ शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि BPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा प्रणाली की जांच प्रक्रिया पर भी संदेह उत्पन्न कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार,विजय कुमार सिंह 1 जुलाई 2006 से अलौली प्रखंड में शिक्षक के रूप में कार्यरत रहे हैं। उन्होंने BPSC द्वारा आयोजित TRE-1 परीक्षा में उत्तीर्ण होकर नवंबर 2023 में माध्यमिक विद्यालय लड़ही में नियुक्ति प्राप्त की और फरवरी 2024 में TRE-2 के माध्यम से उच्च माध्यमिक विद्यालय सन्हौली में चयनित हुए। हालांकि, माध्यमिक विद्यालय में उनके कार्यकाल की अवधि मात्र दो वर्षों की है,जबकि प्रधानाध्यापक पद के लिए आठ वर्षों का अनुभव आवश्यक होता है।

इस अनियमितता से जुड़ी शिकायतें शिक्षा विभाग के टोल-फ्री नंबर पर दर्ज की गई हैं। शिकायत क्रमांक CCC7201270855 (विजय कुमार सिंह) तथा CCC6963820983 (उनके भाई नवल कुमार सिंह) के नाम से ऑनलाइन दर्ज की गई हैं। नवल कुमार सिंह पर भी फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र के आधार पर प्राथमिक शिक्षक से सीधे प्रधानाध्यापक पद हासिल करने का आरोप है।नवल कुमार सिंह TRE 1 से पहले PS SIWANA ALOULI में कार्यरत रहे हैं वहीं TRE1 में SC LABHGOAN JALKOURA में शिक्षक के रूप में कार्यरत रहे हैं।

इतना ही नहीं, विजय कुमार सिंह को खगड़िया जिले में बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा 2025 के लिए केंद्राधीक्षक भी बना दिया गया है। जबकि नियमों के अनुसार केवल वे प्रधानाध्यापक जो नियमपूर्वक माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत हैं, उन्हें ही यह जिम्मेदारी दी जा सकती है।मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विजय कुमार सिंह को खगड़िया के शिक्षा विभाग में पदस्थापना डीपीओ निशीथ प्रवीण का करीबी बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल एक तस्वीर में दोनों को साथ बैठकर हंसते हुए देखा जा सकता है, जिससे मिलीभगत की आशंका और गहरी हो गई है।स्थानीय सूत्रों के अनुसार, विजय कुमार सिंह पूर्व में अलौली प्रखंड में ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (BRP) के पद पर कार्यरत रहे हैं। उस दौरान भी उनके खिलाफ स्नातक प्रमोशन के नाम पर पैसे की उगाही जैसे गंभीर आरोप लगे थे, जो बाद में रद्द भी कर दिए गए।स्थानीय ग्रामीणों, शिक्षकों और अभिभावकों ने इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया दी है। लोगों का कहना है कि इस तरह के फर्जीवाड़े योग्य और मेहनती अभ्यर्थियों के अधिकारों का खुला अपमान हैं। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि आखिर BPSC जैसी प्रतिष्ठित संस्था कैसे फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्रों को बिना जांचे मान्यता दे देती है?अब सवाल यह उठता है कि क्या जिला शिक्षा पदाधिकारी और संबंधित जांच एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करेंगी, या यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह विभागीय संरक्षण में दबा दिया जाएगा?यह मामला शिक्षा व्यवस्था के उस काले सच को उजागर करता है, जो वर्षों से भ्रष्टाचार और मिलीभगत की चादर में छिपा बैठा है। यदि समय रहते इस पर कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो इससे न केवल योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य संकट में पड़ेगा, बल्कि शिक्षा तंत्र में लोगों का भरोसा भी बुरी तरह टूट जाएगा।














































