फर्जी बहाली का भंडाफोड़ करने वाले पूर्व पुलिस अवर निरीक्षक की गुहार—न्याय नहीं मिला तो पीएम की सभा में करूंगा आत्मदाह…

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फर्जी बहाली का भंडाफोड़ करने वाले पूर्व पुलिस अवर निरीक्षक की गुहार—न्याय नहीं मिला तो पीएम की सभा में करूंगा आत्मदाह…

प्रवीण कुमार प्रियांशु। खगड़िया

फर्जी बहाली और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना एक पूर्व पुलिस अवर निरीक्षक को भारी पड़ गया। खगड़िया जिले के मानसी थाना में पदस्थापित रहे पूर्व पुलिस अवर निरीक्षक अमलेन्दु कुमार सिंह ने प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर गंभीर आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि उन्हें शीघ्र न्याय नहीं मिला, तो वे प्रधानमंत्री की आगामी बिहार दौरे के दौरान आम सभा में आत्मदाह कर लेंगे।

हाजीपुर, वैशाली निवासी अमलेन्दु कुमार सिंह ने पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, राज्यपाल सहित देश-प्रदेश के कई शीर्ष अधिकारियों को संबोधित कर न्याय की गुहार लगाई है। अपने तीन पृष्ठों के आवेदन में उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे उन्होंने खगड़िया जिले में रहते हुए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक द्वारा की गई कथित फर्जी बहालियों और भ्रष्टाचार का खुलासा किया, जिसके बाद उन्हें षड्यंत्रपूर्वक झूठे मामलों में फंसाया गया।पूर्व पुलिस अवर निरीक्षक का आरोप है कि उन्हें पहले मनगढ़ंत धाराओं में फंसाकर गिरफ्तार किया गया, फिर जेल भेज दिया गया और बाद में सेवा से निलंबित कर दिया गया। इतना ही नहीं, उन्हें मिलने वाला जीवन यापन भत्ता तक रोक दिया गया, जिससे उनका और उनके परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो गया है।

अदालत और मुख्यालय के आदेश का नहीं हो रहा पालन…

अमलेन्दु सिंह ने यह भी बताया कि पटना उच्च न्यायालय तथा बिहार पुलिस मुख्यालय द्वारा उनके पक्ष में आदेश पारित किए गए, जिनमें जीवन यापन भत्ता भुगतान और सेवा से निलंबन समाप्त करने की बात कही गई। बावजूद इसके स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी आदेशों का अनुपालन नहीं कर रहे हैं।उन्होंने दावा किया कि रोहतास स्थानांतरण के बाद उन्हें जानबूझकर आर्थिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उनके अनुसार, पिछले कई महीनों से उन्हें कोई वेतन नहीं दिया गया, जिससे उनके परिवार की स्थिति दयनीय हो चुकी है।

सीबीआई या सीबीसी स्तर की जांच की मांग…

अमलेन्दु सिंह ने स्पष्ट तौर पर मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच CBI या CBC जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों के खिलाफ उन्होंने भ्रष्टाचार उजागर किया, वे अब भी सक्रिय हैं और उन पर प्रभाव डाल रहे हैं।

20 जुलाई तक का दिया अल्टीमेटम…

अपने पत्र में उन्होंने अंतिम चेतावनी देते हुए लिखा है कि यदि 20 जुलाई 2025 तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे मजबूर होकर प्रधानमंत्री की आमसभा में आत्मदाह जैसा कदम उठाएंगे। उन्होंने इसे अपने आत्मसम्मान, न्याय और लोकतंत्र की रक्षा की अंतिम कोशिश बताया।

मानवाधिकार हनन का गंभीर आरोप…

पत्र में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूरे मामले में पुलिस विभाग द्वारा उनके साथ किया गया व्यवहार मानवाधिकार का खुला उल्लंघन है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।

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